सतना जिले में कक्षा परिवर्तन के बीच 17 हजार से ज्यादा विद्यार्थी ड्रॉपआउट, सबसे खराब स्थिति सोहावल ब्लॉक की। बड़ी कक्षाओं में हालात चिंताजनक, शिक्षा विभाग सुधार के दावे कर रहा है।
रीवा और मऊगंज जिले के 75 हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों की मान्यता इस वर्ष समाप्त हो रही है। लोक शिक्षण संचालनालय ने 15 दिसंबर से ऑनलाइन आवेदन शुरू करने की तिथि तय की है, और यदि निर्धारित समयसीमा में नवीनीकरण पूरा नहीं किया गया तो इन स्कूलों पर ताला लग सकता है।
सतना जिले में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा गंभीर शिक्षक संकट से गुजर रही है। जिला शिक्षा केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार 317 सरकारी स्कूल या तो पूरी तरह शिक्षक विहीन हैं या केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। 40 विद्यालयों में एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि 277 स्कूल केवल एक शिक्षक पर निर्भर हैं। मझगवां, नागौद और उचेहरा जैसे विकासखंड सबसे अधिक प्रभावित हैं। Collector–DPC स्तर पर स्थिति सुधारने के लिए मर्जर और पदस्थापना पर चर्चा जारी है, लेकिन फिलहाल हजारों बच्चों की शिक्षा अधर में लटकी हुई है।
मध्यप्रदेश में नर्सिंग शिक्षा का बड़ा संकट: 2025-26 सत्र के लिए 28,560 सीटों में से लगभग 10,825 सीटें (50% तक) खाली रहने का अनुमान है। जानें क्यों गिर रहा है छात्रों का भरोसा, क्या है फर्जी कॉलेजों और सरकारी निगरानी की कमी का असर।
रीवा जिले के सरकारी कॉलेजों में इस बार एडमिशन प्रक्रिया बुरी तरह फ्लॉप रही। 18 कॉलेजों में कुल 27,445 सीटों में से 10,142 सीटें खाली रह गईं। खासकर बैकुंठपुर और संस्कृत कॉलेजों की हालत बेहद खराब है। बैकुंठपुर कॉलेज में 1260 सीटों में से केवल 39 पर ही एडमिशन हुआ। कई नामी कॉलेज भी सीटें नहीं भर पाए, जिससे उच्च शिक्षा की गिरती मांग पर सवाल उठ रहे हैं।
पन्ना जिले में शासकीय विद्यालयों की बदहाल व्यवस्था पर हिंदू युवा वाहिनी ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जर्जर भवन, खस्ताहाल शौचालय और पानी की समस्या को लेकर संगठन ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
पन्ना जिले के पवई ब्लॉक के ग्राम करही में स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर विद्यालय जाने को मजबूर हैं। टूटा हुआ रास्ता, बहती नहर और लबालब तालाब बच्चों के जीवन को खतरे में डाल रहे हैं। शिक्षक हाथ पकड़कर बच्चों को पार करा रहे हैं, लेकिन प्रशासन बेखबर है। कई बार शिकायत के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। जानिए ज़मीनी हकीकत इस रिपोर्ट में।
कोटर तहसील के सरकारी स्कूल जर्जर भवनों, शिक्षकों की गैरमौजूदगी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा खतरे में है, लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
सतना के मझगवां क्षेत्र में छात्राएं स्कूल में पढ़ाई की जगह पानी ढोने को मजबूर हैं। नल-जल योजना कागजों तक सीमित, जिम्मेदारों पर सवाल खड़े।
छात्रों की पढ़ाई पर संकट! सतना समेत कई जिलों में एनसीईआरटी की किताबें उपलब्ध नहीं हैं। नई शिक्षा नीति के अनुरूप किताबें अब तक बाजार में नहीं आईं, जिससे कक्षा 5वीं और 8वीं के विद्यार्थी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। जानिए कारण और इसके दुष्परिणाम।






















